Success Story and Startup Story Of Young Entrepreneur Paras Chopra Founder Of Wingify.com

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Success Story and Startup Story of Winglfy.com, Paras Chopra Success Story

Paras Chopra Startup and Success story in hindi.

Aaj ka jo post hai wo ek aise Entrepreneur ki hai. Jise ham ab tak nahi jante. Ham aaj aapko startup story batane jaa rahe hai taki aap bhi jaan sako aur unn entrepreneur se kuch sikh sako jo college dropout karne ke bawjood bhi apni pehchan banayi. Ji haa aap bhi apni pehchan bana sakte hai. to aayiye jante hai founder of wingify.com Paras Chopra ki Success Story. aaj ka post hame Rambharat Singh ne bheja hai taki aapko iss Blog ke madyam se Inspire aur motivate kiya ja sake. Wo khud ek Blogger hai jo apne blog pe bhi Aisi hi success story aur startup Story Post karte rahte hai.

Success Story Of paras Chopra Founder Of Wingify

भरोसा खुद पर रखो तो ताकत का एहसास कराता है यदि उसी भरोसे को आप दूसरों पर रखो तो कमजोरी बन जाता है।
इसी पर आधारित आज की हमारी कहानी बायो-टेक्नोलॉजी से पास आउट पारस चोपड़ा की जिन्होंने लोगों को दिखा दिया कि अगर इंटरेस्ट और करने की चाह होती है। तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है।

ऐसी ही सोच रखने वाले पारस चोपड़ा ने अपनी सक्सेसफुल जॉब को छोड़कर उस फील्ड में कदम रखा जिसका उन्हें बिल्कुल भी अनुभव नहीं था।
उस फील्ड में पारस ने अपनी सफलता के ऐसे झंडे गाड़े कि आज उन्हें सक्सेसफुल बिजनेसमैन की लिस्ट में लाकर खड़ा कर दिया।
आज उनकी कंपनी wingify 70 करोड़ का बिजनेस करती है जो अपने आप में एक दिलचस्प बात है। तो चलिए जानते हैं- पारस चोपड़ा के बारे में उन्होंने कैसी खड़ी कर दी 70 करोड़ टर्नओवर करने वाली कंपनी।

Paras chopra की startup success story in hindi (जॉब से wingify तक का सफर)

पारस चोपड़ा का जन्म पंजाब में हुआ था। पारस बचपन से ही अपने स्कूल और अपनी उम्र के बच्चों से काफी होशियार और पढ़ाई में अच्छे होनहार बच्चों में से एक थे।

पारस ने अपने पिता को कंप्यूटर चलाते देखते हुए ही वह भी बचपन से ही कंप्यूटर में रुचि लेने लग गए थे। लेकिन पारस की बचपन की सबसे खास बात यह थी कि वह कंप्यूटर में गेम खेलने या कुछ भी एंटरटेनिंग वीडियो देखने के बजाए कुछ इंटरेस्टिंग सीखना प्रोग्रामिंग करने को वरीयता और दिलचस्पी दिखा रहे थे।

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इसी दिलचस्पी की बदौलत अन्य बच्चे जिस उम्र में कंप्यूटर पर गेम खेलने में रूचि दिखाते हैं। वही पारस महज 13 साल की उम्र में ही प्रोग्रामिंग करने लग गए थे। पारस का स्कूल पूरा होते-होते पारस प्रोग्रामिंग में माहिर हो चुके थे।

पारस ने अपनी स्कूली पढ़ाई कंप्लीट करने के बाद उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में बायो टेक्नोलॉजी में एडमिशन लिया। लेकिन उनके पेरेंट्स उनसे सब्जेक्ट बायो टेक्नोलॉजी से खुश नहीं थे। वह पारस को उनके इंटरेस्ट के अकॉर्डिंग कंप्यूटर साइंस दिलाना चाहते थे। इसी दौरान पारस ने अपने इंटरेस्ट यानी कि प्रोग्रामिंग में काफी सुधार किए।

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कॉलेज के समय में पारस अपनी स्किल्स का उपयोग करके मॉडल तैयार करने में किया करते थे। वह इस चीज में इतने माहिर हो गए थे कि वह अपने क्लासमेट और मित्रों के लिए मॉडल बना दिया करते थे। इस काम ने पारस को data mining और Analytics के प्रति आकर्षित किया।

एक बार कॉलेज के दिनों में पारस ने how to start up पर एक आर्टिकल पड़ा। तब उनके जहन में स्टार्टअप करने की तीव्र इच्छा हुई। इसी के चलते पारस ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान 3 4 startup मैं भी हाथ आजमाया। लेकिन तब business experience के अभाव से यह startup business मैं तब्दील नहीं हो सके। लेकिन इन startup के चलते पारस को काफी कुछ सीखने का मौका मिला जो आगे चलकर उनके बहुत काम आने वाला था।

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2008 में पारस ने gold medal के साथ अपनी ग्रेजुएशन कंप्लीट की और उसके बाद वह Aspiring mines मैं बतौर RND मैं इंजीनियरिंग की जॉब करने लगे। लेकिन वह कहते हैं ना जहां चाह होती है वहां राह निकल ही आती है पारस के अंदर अभी भी कहीं ना कहीं स्टार्ट अप की चिंगारी दबी हुई थी अब पारस ने अपने इंटरेस्ट के हिसाब से एक लिस्ट बनाना स्टार्ट कर दिया। यहीं से उन्हें marketing Optimization theme का concept सामने आया। और यही से उन्हें wingify का idea मिल गया ।
लेकिन पारस की सबसे डिफरेंट बात यह थी कि उन्हें मार्केटिंग ऑप्टिमाइजेशन का बिल्कुल भी अनुभव नहीं था।

वैसे अगर देखा जाए तो पारस का बिना अनुभव के इस फील्ड में उतरना एक जोखिम भरा फैसला था। लेकिन कुछ अच्छा करने के लिए हर इंसान को कभी न कभी तो रिस्क लेना ही पड़ता है। ठीक ऐसा ही पारस ने किया। पारस को खुद पर भरोसा था कि वह कुछ बेहतर कर सकते हैं। इसी के चलते उन्होंने बहुत सारी बुक्स और इंटरनेट से जानकारियां कलेक्ट की
और पारस ने जॉब के साथ ही इस पर काम करना भी शुरू कर दिया। पारस का मकसद Google Analytics के लिए एक प्लेटफार्म तैयार करने का था जिसके द्वारा यूजर अपनी वेबसाइट को और बेहतर बनाने और वेबसाइट को optimise करने के लिए यूज कर सकें।

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करीब 8 महीने की कड़ी मेहनत के बाद पारस एक अच्छे और कई फीचर वाले product बनाने में कामयाब हो गए। और 2010 में visual website optimizer नाम के इस software को लॉन्च किया।
पारस की सैलरी के कुछ हिस्से से शुरू हुई इस कंपनी ने कुछ ही महीने बाद ही अच्छा टर्नओवर करना स्टार्ट कर दिया। कंपनी के अच्छा बिजनेस करते हुए देख पारस ने अपनी जॉब को छोड़ते हुए अपना पूरा ध्यान और समय इस कंपनी को देना शुरू कर दिया। इसी के चलते जनवरी 2011 तक पारस की कंपनी wingify का टर्नओवर 20 लाख तक का हो गया। जो आज करीब 70 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है। यह टर्नओवर पारस की कंपनी Wingify के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

तो दोस्तों यह थी Paras chopra की startup success story यदि आपको यह startup story पसंद आई हो तो अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर करिए और हमारे दोस्त Raja Ashu जी का ब्लॉग पर ऐसे ही इंस्पायरिंग आर्टिकल पढ़ने के लिए Quickly Startup-Lean Easy Start Immediately ब्लॉग को subscribe करिए और इसी के साथ आप मेरे मोटिवेशनल और स्टार्टअप ब्लॉग www.tophindistory.org को विजिट कर सकते है। धन्यवाद

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